अयोध्या मिल्कीपुर उपचुनाव के लिए मतदान समाप्त, इस सीट पर 65.35 फीसदी मतदान
उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट के लिए सोमवार को प्रचार-प्रसार किया गया। मिल्कीपुर में विधानसभा के लिए आज यानी बुधवार को मतदान हुआ और इस सीट पर 65.35 फीसदी मतदान हुआ।
इस चुनाव के नतीजे 8 फरवरी को आएंगे। समाजवादी पार्टी के नेता अविनाश प्रसाद के 2024 के लोकसभा चुनाव (अयोध्या) से नाम वापस लेने के बाद मिल्कीपुर सीट खाली हुई थी।
समाजवादी पार्टी (सपा) ने जहां विधानसभा में जीत सुनिश्चित करने के लिए अखिल भारतीय ताकतों को पूरी तरह से एकजुट कर दिया था, वहीं मुख्यमंत्री पार्टी (भाजपा) ने पार्टी के शीर्ष नेताओं को पूरी तरह से एकता दिखाने की कोई राहत नहीं दी।
मिल्कीपुर में कुल 10 उम्मीदवार मैदान में थे। कांग्रेस ने जहां सपा उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया, वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने विधानसभा से दूर रहने का फैसला किया। मंडल में भाजपा ने चंद्रभानु प्रसाद को अपना प्रत्याशी बनाया है, जबकि सपा ने अस्थिभंग प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को मौका दिया है।
विधानसभा में भाजपा ने सपा पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाते हुए राष्ट्रवाद का नारा बुलंद किया है। नगीना के अनुमान मंदिर आजाद की अगुवाई वाली आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने भी मिल्कीपुर में अपना प्रत्याशी उतारा है। दावों के मुताबिक 2024 के आम चुनाव में अयोध्या (अयोध्या) में समाजवादी पार्टी के नेता विश्वनाथ प्रसाद की जीत से भाजपा को झटका लगा है, उनकी पार्टी के लिए मिल्कीपुर विधानसभा में हर कीमत पर जीत दर्ज करने की कोशिश जारी है।
सोमवार को होने वाले चुनाव प्रचार से पहले ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने पिछले साल नौ सीटों पर रैलियां की थीं, लेकिन हार के डर से मिल्कीपुर सीट का चुनाव टाल दिया गया।
उन्होंने कहा, ”भाजपा नेताओं का मानना था कि मिल्कीपुर की जनता कभी समाजवादियों का साथ नहीं छोड़ सकती, इसलिए उन्होंने सुनिश्चित किया कि वे चुनाव लड़ें।” लेकिन जो लोग चुनाव लड़ेंगे वो मिल्कीपुर से बाहर निकलने का काम करेंगे। वैसे पिछले कुछ दिनों से अयोध्या में दलित ईसाई की हत्या के मामले को तूल दिया जा रहा है।
